असतो मा सद्गमय - शुभ कर्मन ते कभुं न टरूं - -गुरुपूर्णिमा।
वर्तमान कालखंड में इन वाक्यों का अनुसरण कर अपना मार्ग प्रशस्त करना इस संस्था का मूल उद्देश है जिससे हमारी सामूहिक करनी व कथनी में सामंजस्य बना रहे।
आज गुरु-पूर्णिमा के अवसर पर अपने विचार और कार्यों को एक चिट्ठे के माध्यम से प्रकाशित करने का विचार, गुरु कृपा के बिना असम्भव था आशा है हमारे सद्गुरुओं का आशीर्वाद हमें कर्मयोग में अडिगता से स्थापित रखेगा और इस राष्ट्र व इस श्रृष्टि के मूल धारकों के पक्ष में नियोजित करने में सफलता सुनिश्चित करेगा।
अंत में
जा पर कृपा राम की होई
ता पर कृपा करहिं सब कोई।
जिनके कपट, दम्भ नहिं माया
तिनके ह्रदय बसहु रघुराया।।
असतो मा सद्गमय
-गुरुपूर्णिमा
देह शिवा बर मोहे इहै
शुभ कर्मन ते कभुं न टरूं
न डरौं अरि सों जब जाय लरौं
निश्चय कर अपनी जीत करौं
